जहाँ चाह, वहाँ राह ! | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

केरल में बाढ़ पीड़ितों तक पानी पहुंचाते स्वयंसेवक

शहीद स्वयंसेवक विशाल नैयर|

सेवादूत

डूबते ‘केरल’ की पतवार बना ‘संघ’

अंबरीष पाठक

2018-09-24 18:52:28

मध्य जुलाई 2018 – मानसून अभी शुरू ही हुआ था , देश के बाकी हिस्से में वर्षा जहाॅ राहत की फुहार बनकर बरस रही थी वहीं केरल में सबकुछ ठीक नहीं था।  केरल- जिसे गॉडस ओन कंट्री (देवों का अपना देश) भी कहा जाता है- में जारी भारी वर्षा पिछले सारे रिकार्ड तोड़े दे रही थी। मौसमविज्ञानियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगीं थीं। अंततः 8 अगस्त 2018 की शाम आते-आते केरल  मे स्थित सभी 54 बांधों का वाटर लेवल खतरे की जद में था। और………. केवल  24 घंटे के भीतर इनमें से 34 बांधो के गेट खोलने पड़े। 26 वर्षों में पहली बार इडदुकु बांध के पांचों द्वारों को एकसाथ खोला गया। अब लगभग पूरा केरल अभूतपूर्व जल प्रलय की जद में था। 
 
चेंगन्नूर, पंदानद, एदानद, अरणमुला,कोजहँचेरी, अयिरूर, रन्, पंडालम, कुट्टनद, अलुवा और चलाकुदयी जैसे इलाके तो मानो दिखाई ही नहीं दे रहे थे दिख रहा था तो सिर्फ पानी। 380 से ज्यादा लोगों को अब तक पानी लील गया था।  ऐसा लग रहा था, जैसे देव भूमि केरल पर बाढ़ रूपी किसी विकराल दैत्य ने हमला बोल दिया हो। सब तरफ त्राहि माम्, विध्वंस, मृत्यु और मानवीय बेबसी का दारुण दृश्य था। तभी वासुकी- जिन्हें एक पुराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम द्वारा देवभूमि केरल का रक्षक नियुक्त किया गया था-  की भांति संघ के स्वयंसेवक इस अभूतपूर्व बाढ़ से दो-दो हाथ करने मैदान में कूद पड़े।
 
राष्ट्रीय सेवाभारती से सबद्ध देसीय सेवाभारती के मार्गदर्शन में हज़ारों  स्वयंसेवक कंधे से कंधा मिलाकर राहत कार्यों में जुट गए। चेंगन्नूर जिले  का 24 बरस का विशाल नायर भी इनमें से एक था।विशाल ने परहित सरस धर्म नहीं भाई के संस्कार शाखा से सीखे थे। वह जांबाज युवक बाढ़ में डूब रहे लोगों को निकालने के लिए जान पर खेल गया ।  केरल में जारी राहत कार्यों का संचालन कर रहे सेवाभारती त्रिवेंद्रम खंड सचिव श्री एस.जयकृष्णन जी बताते हैं कि पिता वेणुगोपाल नायर, माता जयश्री और बहन अथिरा नायर को सुरक्षित स्थान पर पहुँचानें के पश्चात 16 अगस्त की अलसुबह करीब 4 बजे विशाल  बाढ़ में फॅसे 50 परिवारों को बचाने के लिए चलाये जा रहे रेस्क्यू ऑपरेशन की अग्रिम पंक्ति के स्वयंसेवकों  के साथ जुटा था। तभी नज़दीकी मुरियप्पा ब्रिज के पार उसने एक व्यक्ति को डूबते देखा। विशाल बिजली के वेग से उस ओर दौड़ा और उफनते जल में छलांग लगा दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाढ़ के पानी का वेग इतना तेज़ था कि उसने विशाल को भी जकड़ लिया। उस डूबते व्यक्ति की जान तो ग्रामीणों ने बचा ली, लेकिन विशाल को नहीं निकाला जा सका। तीन दिन पश्चात विशाल का शव घटनास्थल से सौ मीटर दूर जलमग्न मिला। विशाल की बहन अथिरा नायर कहती हैं “निसंदेह मेरे बूढ़े माता-पिता नें अपने एकलौते पुत्र को खोया है,पर विशाल हम सबके दिलों में  हमेशा जीवित रहेगा, हमें उसके बलिदान पर गर्व है”।
 
देसीय सेवाभारती के मार्गदर्शन में केरल में जारी इस अभूतपूर्व राहत कार्य में 8,5000 स्वयंसेवक दिन-रात अपनी जान की बाज़ी लगा पीड़ितों की सहायता में जुटे हैं। बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित अलापुजहा जिले में सेवाभारती द्वारा 25 मेडिकल कैम्प स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त  अन्य स्थानों पर  125 रिलीफ कैम्पस चलाये जा रहें हैं। 150 नावों और 70 एम्बुलेंसों के बेड़े से लैस उत्साही स्वयंसेवकों की टीमें 24 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। अभी तक लगभग 70 हज़ार पीड़त  स्वयंसेवकों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। बाढ़ पीड़ितों की सहायतार्थ थिरिससुर जिले में एक सेंट्रलाइज्ड हेल्प डेस्क भी सेवाभारती द्वारा स्थापित की गई है। 
इसी सब के बीच भारत सरकार ने केरल में आई इस बाढ़ को लेवल-3 कैलेमिटी का दर्जा देते हुए, इसे अत्यंत गंभीर आपदा माना है। आपदा व बचाव का संघर्ष तो अब समाप्त हो चुका है।अब स्वयंसेवक बेघरबार हुए लोगों के पुनर्वास में जुट गए हैं।