गांव हो तो बघुवार जैसा-(मध्यप्रदेश) | सेवा की गंगोत्री- डाक्टर माधवराव परलकर | डूबते ‘केरल’ की पतवार बना ‘संघ’ |

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

परिवर्तन यात्रा

बघुवार का न्याय मंदिर यानी पंचायत भवन

गांव हो तो बघुवार जैसा-(मध्यप्रदेश)

प्रदीप कुमार पाण्डेय

यह सच है कि, असली भारत गांवो में बसता है। यदि आप सब किसी आईडियल विलेज को देखना चाहते हैं तो मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के बघुवार गांव चलिए।  साफ सुथरी सड़के ,भूमिगत नालियां , हर घर में शौचालय, खेलने के लिए इनडोर स्टेडियम , व खाना बनाने के लिए बायो गै

और जानिये

समर्पित जीवन

नाना पालकर स्‍मृति समिती रूग्‍ण सेवा सदन

सेवा की गंगोत्री- डाक्टर माधवराव परलकर

विजयलक्ष्मी सिंह

बेहोश बालक के शरीर पर ज्यों–ज्यों डॉक्टर की उंगलियां चल रहीं थीं, बच्चे में हो रही हलचल को देखकर मां की आंखो की चमक बढ़ती जा रही थी। बेटे के इलाज में पानी की तरह पैसा बहाने के बाद भी ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं थी, फिर डॉ परलकर ने तो फीस के रूप में एक र

और जानिये

सेवादूत

डूबते ‘केरल’ की पतवार बना ‘संघ’

अंबरीष पाठक

मध्य जुलाई 2018 – मानसून अभी शुरू ही हुआ था , देश के बाकी हिस्से में वर्षा जहाॅ राहत की फुहार बनकर बरस रही थी वहीं केरल में सबकुछ ठीक नहीं था।  केरल- जिसे गॉडस ओन कंट्री (देवों का अपना देश) भी कहा जाता है- में जारी भारी वर्षा पिछले सारे रिकार्ड तोड़े दे रही थी। मौसमविज्ञानियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगीं थीं। अंततः 8 अगस्त 2018 की शाम आते-आते केरल  मे स्थित सभी 54 बांधों का वाटर लेवल खतरे की जद में था। और………. केवल  24 घंटे के भीतर इनमें से 34 बांधो के गेट खोलने पड़े। 26 वर्षों में पहली बार इडदुकु बांध के पांचों द्वारों को एकसाथ खोला गया। अब लगभग पूरा केरल अभूतपूर्व जल प्रलय की जद में था। 

और जानिये