सपनों का एक गांव - रविंद्रनगर (मियांपुर) उत्तरप्रदेश | हिमालय पुत्र- डॉक्टर नित्यानंद| अंधकार में डूबे लोंगो को थमाई रोशनी की मशाल (उड़ीसा)’ |

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परिवर्तन यात्रा

हरा भरा सुंदर गांव रविंद्रनगर

सपनों का एक गांव - रविंद्रनगर (मियांपुर) उत्तरप्रदेश

प्रदीप कुमार पाण्डेय

यह कहानी है प्रकृति व मानव की मित्रता की । 1947  में विभाजन की पीड़ा सहकर अपना सबकुछ खोकर शरणार्थी  बनकर आए बंगाली परिवारों के पुरूषार्थ की, जिन्होंने अपने परिश्रम से बालू की टीलों को लहलहाते खेतों में तब्दील कर दिया।  गुरूदेव रविंद्रनाथ ठाकुर क

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समर्पित जीवन

आधुनिक संत नित्यानंदजी

हिमालय पुत्र- डॉक्टर नित्यानंद

पारितोष बंगवाल

ईश्वर ने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य प्रदान किया है उत्तराखंड को । पहाड़ों की रानी मसूरी को देखने तो लाखों पर्यटक मानो खिंचे चले आते हैं। परंतु इस खूबसूरती से पहाड़ियों के जीवन की कठिनाईयां कम नहीं हो जाती। पहाड़ की इसी पीड़ा को सच्चे मन से समझने व द

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सेवादूत

अंधकार में डूबे लोंगो को थमाई रोशनी की मशाल (उड़ीसा)

विजयलक्ष्‍मी सिंह

फैनी का इटालियन भाषा में अर्थ होता है  मुक्त !  200 कि.मी प्रतिघंटे से भी अधिक गति की इन बेलगाम हवाओं ने उडीसा में जो कहर बरपाया है वो हम सब की कल्पना से भी परे है। कटक, भुवनेश्वर, खुर्दा, पुरी समेत, पांच जिलों के अधिकांश कस्बे अंधेरे में डूब गए है।एक लाख 56 हजार बिजली के पोल उखड़ गए हैं . डेढ़ करोड़ से अधिक  नारियल के पेड़ इन तेज हवाओं से तहस-नहस हो गए हैं ।,  गांव के गरीब किसानो के पास न खेती बची न घर। 64 लोगों व 65,000 मवेशियों को ये भयावह चक्रवात लील गया।बिना छत के मकानों में अपना सबकुछ गंवा बैठे लोगों को सहारा देने सबसे पहले पहुंचे संघ के स्वयंसेवक।

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