जहाँ चाह, वहाँ राह ! | एक नाम जो सेवा का पर्याय बना – विष्णु कुमार जी |गुजरात बाढ़ – स्वयंसेवकों का भागीरथ अभियान

सेवागाथा - राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सेवाविभाग की नई वेबसाइट

परिवर्तन यात्रा

श्री विजया परिवार आश्रम - डोंगरमोथा

हर श्वास में है ‘सेवा ’ जहाँ

शशांक सावजी

कमरे की लाइट ऑन करते ही वो महिला अचानक जोर-जोर से चीखने लगी- “………. बबब…बब ब ब….बंद करो यह रौशनी…..ह ह ह …हटाओ इ…इ इसे यहाँ से ….. जाने दो मुझे…. न न नहीं रहना म म..म मुझे यहाँ”।   पति के देहांत के बाद इस वृध्दा   की देखभाल करने वाला कोई न था।  घर का  इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन कट जाने के चलते मजबूरी में 9 साल अंधेरे में रही रजनी देवी को तो अब उजाले से डर सा लगने लगा था। तभी उनका हाथ थामा विजया परिवार ने। नागपुर से 60 किलोमीटर  दूर एक छोटे से गांव डोंगरमौथा में स्थित इस सेवाश्रम मे असाध्य बीमारियों से ग्रस्त रोगियों की जीवनपर्यंत  सेवा की जाती है। 

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समर्पित जीवन

महान तपस्वी - कात्रे गुरु जी

चले निरंतर साधना - कात्रे गुरुजी

विजयलक्ष्मी सिंह

कुष्ठ रोग की कल्पना मात्र से ही मन सिहर उठता है, गल चुके हाथ पैर, घावों से रिसता मवाद, आसपास भिनभिनाती मक्खियाँ, समाज से बहिष्कृत घृणा के पात्र, नारकीय जीवन जीते रोगी । आज से 50 वर्ष पहले जब इनके अपने इन्हें अभिशाप मानकर त्याग देते थे, तब किसी ने अपने स्नेह

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सेवादूत

जीत साहस की

विकास दवे

जिंदगी व मौत को सबसे पास से देखने वाले डाक्टर हर दिन एक नई परीक्षा से गुजरते हैं।किंतु आज तो डाक्टर ॠषि के जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा थी। 23 नौनिहालों की जिंदगी दांव पर लगी थी । वार्ड में आग लग गई थी व अग्निशामक सिलेंडर की गैस से आग बुझाने की कोशिश भी नाकाम हो चुकी थी । मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा )वार्ड के एसी में लगी आग ने सभी नवजात बच्चों का जीवन संकट में डाल दिया था। तब ड्यूटी पर मौजूद संघ के प्रथम वर्ष शिक्षित स्वयंसेवक डाक्टर ऋषि द्विवेदी ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अपने अदम्य साहस व त्वरित बुद्धि से इन मासूमों को आग की भेंट चढ़ने से बचा लिया।

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